उनके पास बहुत ही सुन्दर एक नीली छतरी थी। जिसने बीन्या के मन को मोह लिया था। उन लोगों में से एक महिला को बीन्या के गले में पड़ा माला भा गया। गांव के लोग ऐसे माला पहनते थे। सौभाग्य के रूप में उन्होंने
बीन्या के गांव से बाघ नख खरीदने का निश्चय किया। तो बीन्या ने झट बदले में छतरी माग ली।बीन्या सुन्दर छतरी को पाकर बहुत खुश थी। उसे हर समय खुला रखा करती थी। और जहां जाती वो साथ लेकर जाती।
वो रेशम की नीली छतरी पूरे गांव में प्रसिद्ध हुई। गांव के ज्यादातर लोगों को बीन्या से जलन होती थी। क्योंकि इतना सुन्दर छतरी किसी ने कभी देखी नही थी। पर गांव के बच्चे बीन्या से छतरी की तारीफ करने से नही थकते थे।
ताकि बीन्या कुछ पल के लिए छतरी पकड़ने को दे दे
बीन्या दे भी देती थी। कुछ समय के लिए जल्द ही मानसून आ गए और खूब बारिश हुई छतरी ने बीन्या का खूब साथ निभाया पहले इतने कड़े धूप फिर इतने बरिशे झेलकर नीली छतरी थोड़ा फिकी पड़ गई थी।
पर फिर भी बीन्या का प्यार और गांव के लोगों कि जलन कम नही हुई थी। गांव का एक दुकानदार राम भरोसा को वो छतरी बहुत ही लुभाती थी। उसने बीन्या से खरीदने की इच्छा जाहिर की थी। पर बीन्या ने उसे साफ मना कर दिया राम भरोसा के मन में नीली छतरी बैठ गई थी।
बारिशों के दौरान स्कूलों कि छुट्टी हो गई थी। राम भरोसा ने दूसरे गांव के एक लड़के को अपनी दुकान में हाथ बटाने के लिए रखा था। और उस लड़के का नाम राजा राम था। राजा राम बहुत चालक लड़का था। जब राम भरोसा को छतरी की मोह के बारे में पता चला तो उसने राम भरोसा से सौदा किया।
३₹ में मौका पाकर उसने बीन्या की छतरी को चुरा लिया पर वो छतरी बीजू के हाथ लग गया। और खूब मार पीट हुआ। जब उसने उसे पूछा कि तुमने ऐसा क्यों किया। तो उसने राम भरोसा का नाम ले लिया। और उसने मुझे धमकी दी। ताकि वो छतरी को चुराए। नही तो मै तुम्हें नौकरी से निकाल दूंगा।
सब ने उसकी बातो को मान लिया। राम भरोसा का नीली छतरी के प्रति मोह जग जाहिर था। और धीरे _धीरे लोगों ने राम भरोसा पर भरोसा करना छोड़ दिया। और उसके दुकान की विक्री काफी कम हो गई। गांव के लोग दूर की दुकानों से सामान लाने लगे। खर्चा कम करने के लिए।
राम भरोसा ने राजा राम को नौकरी से निकाल दिया था। अब वह बहुत ही अकेला हो गया था। और बहुत ही उदास रहने लगा। क्योंकि ना तो विक्री हो रही थी। और नही गांव के लोग वहां आते थे। बीजू और बीन्या उसके दुकान के सामने से रोज गुजरते थे। बीन्या अपना मुंह फेर लेती थी। कही ना कही राम भरोसा की उदासी को अपना बदकिस्मती मानने लगी थी।
कुछ दिनों बाद राम भरोसा के दुकान पर बीन्या टाफी खरीदने गई। राम भरोसा को उसके ऊपर सक हुआ। की कही वो खोटा सिक्का तो नही लायी है। या वह अपने छतरी से कही उसे जलाने को तो नही आयी है। वो जब चली गई तो राम भरोसा ने देखा की वो छतरी वही भूल गई थी। राम भरोसा को जो चीज़ हमेशा से चाहिए था।
वो अपने आप ही चलकर उसके दुकान पर आ गई। बस उसे उस छतरी छुपा लेना था। फिर राम भरोसा ने सोचा कि अब ये मेरे किस काम कि ना तो मै अब धूप में निकलता हूं। ना ही मै बारीश में उसने बीन्या को आवाज़ लगाई तुम अपना छतरी भूल गई हो। बीन्या ने बहुत ही खूबसूरत लहज़े में कहा तुम्ही रख लो मुझे इसकी आवश्यकता नही है।
पर राम भरोसा ने कहां कि गांव की सबसे सुन्दर छतरी है। बीन्या बोली कि मुझे पता है। पर ये छतरी ही सब कुछ नही है। और वो कहकर चल पड़ी। अब वो छतरी राम भरोसा का हो चुका था। बीन्या ने उसे तोफे में दिया था। ऐसा वो सबको बताता था। तो अब गांव वाले उस पे भरोसा करने लगे थे। धीरे_धीरे उसकी दुकान भी अब चलने लगी।
अब जब भी बीजू और बीन्या उसके दुकान पर आते। तो उन्हें चाय में ज्यादा दूध और शक्कर डाल के देता था। एक दिन एक भालू राम भरोसा के दुकान के छत पर आया । कुछ खाने की तालाश में छत के ऊपर एक कद्दू को खा रहा था। पर छत के ऊपर चढ़ते वक्त उसका एक नाखून टूट गया।
राम भरोसा को सुबह अपने दुकान को खोलते वक्त दुकान के दरवाज़े के सामने पड़ा मिला। ये बड़ा सुभ माना जाता है। राम भरोसा ने उस नाख़ून को चांदी की हार में फिट करवाया । जब बीन्या राम के दुकान के पास से गुजर रही थी। तो उसने उसे आवाज़ दी और वो बीन्या को चैन दिखाई बीन्या को वो बहुत सुंदर लगी।
पर वो बोली इसे खरीदने के लिए मेरे पास इतने पैसे नही है। राम भरोसा बोला की मुझे पैसा नही चाहिए। और वो हार बीन्या को उपहार में दे दिया। भालू का नाखून बहुत शुभ होता है। बीन्या सुन्दर हार को पाकर बहुत खुश थी। राम भरोसा को बीन्या का मुस्कुराना कभी नहीं भुला। और उसके बाद बीन्या अपने गायों के साथ सुरक्षित अपने घर पहुंची। The end
