लोगों के साथ व्यवहार का बड़ा रहस्य

 
 इस धरती पर किसी से कोई काम कराने का एक तरीका है। क्या आप भी कभी यह सोचने के लिए रुके है? हां, सिर्फ एक तरीका और वह है, उस इंसान में उस काम को करने की इच्छा जगाना । 

याद रखिए और कोई तरीका नहीं है। 

हां, वैसे आप किसी पर रिवाल्वर तानकर भी उसे उसकी घड़ी देने से मजबूर कर सकते हैं। आप अपने कर्मचारियों को सहायता करने पर मजबूर कर सकते हैं_जब तक आप पीछे न मुड़ जाए, उनको नौकरी से निकलने की धमकी देकर। आप किसी बच्चे से डाटकर या थप्पड़ मारकर, जो भी कराना चाहें,करा सकते हैं,पर इन तरीकों के ऐसे परिणाम आ सकते हैं,जो आपको पसंद न आए। मैं आपसे कोई  काम तभी करा सकता हूं, जब मैं आपको वह दू जो आप चाहते है।

आप चाहते क्या हैं।

सिगमंड फ्रायड ने कहा कि जो भी हम चाहते हैं, उसके पीछे सिर्फ दो प्रयोजन होते हैं_ सेक्स की इच्छा और महान बनने की  इच्छा। 
जान डेवी अमेरिका के सबसे महान दर्शानिको में से एक ने इस कुछ अलग शब्दों में बताया है। डॉक्टर डेवी ने कहा है कि इंसानी स्वभाव की सबसे गहरी इच्छा है_ महत्वपूर्ण होने की इच्छा । इस मुहावरे को याद रखें_महत्वपूर्ण होने की इच्छा । यह जरूरी है। इसे आप  इसमें  कई बार पढ़ेंगे।

आप क्या चाहते है? कई चीजें नहीं, बल्कि कुछ चीजें जो आप चाहते हैं और आपकी गहरी इच्छा है कि वे आपको जरूर मिले। अधिकतर लोगों द्वारा चाही जाने वाली कुछ चीजें हैं_
(१)सेहत और जीवन की सुरक्षा। (२)भोजन।(३) नींद।(४)पैसा और पैसा से खरीदी जाने वाली चीजे।(५)आगे का जीवन।(६)सेक्स की  इच्छा पूर्ति।(७)अपने बच्चो का भला।(८) महत्वपूर्ण होने का अहसास।

इनमें लगभग सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं_एक के अलावा। सिर्फ एक अभिलाषा है, जो भोजन या नींद की इच्छा जितनी गहरी और अनिवार्य है, जो शायद ही पूरी होती है। इसे फ्रायड महान होने की इच्छा कहते हैं। इसे डेवी महत्वपूर्ण होने की इच्छा कहते हैं।

लिंकन ने एक पत्र शुरू करते हुए कहा था_"तारीफ सभी को पसंद है।" विलियम जेम्स ने कहा था _इंसानी स्वभाव में सबसे गहरा सिद्धान्त प्रशंसा की तड़प है।" उन्होंने ध्यान रहे, प्रशंसा की इच्छा या अभिलाषा या कामना के बारे में नहीं कहा। उन्होंने प्रशंसा की तड़प कहा।

यह एक कभी न कम होने वाली इंसानी भूख है और जो भी विरला इंसान दिल की इस भूख को ईमानदारी से संतुष्ट करेगा,वह लोगों को मुट्ठी में रखेगा और उसकी मृत्यु पर तो यमराज को भी दुख होगा।

महत्वपूर्ण होने की इच्छा इंसानों और जानवरों के बीच का एक मुख्य अंतर है। विस्तार से बताऊं तो जब  मैं मिसुरी में खेत में काम करने वाला लड़का  था, मेरे पिता ड्यूरोक_जर्सी सुअर और सफेद चेहरे वाले मवेशी गांव के मेलों में ले जाते थे।हम मध्य _पश्चिम में अपने सुअर और सफेद चेहरे वाले मवेशी गांव के मेलों में ले जाते थे। हम अक्सर प्रथम पुरस्कार ले जाते थे। मेरे पिता नीले रिबन एक सफेद कपड़े पर लगाते थे और जब दोस्त या अन्य लोग हमारे घर आते थे, वे उस सफेद कपड़े को निकालते थे। वे दोनों छोरों को पकड़कर उन सारे नीले रिबनो को दिखाते थे। 

उन रिबनो से सुअर को कोई फर्क नहीं पड़ता था, लेकिन मेरे पिता को पड़ता था। ये पुरस्कार उन्हें महत्वपूर्ण होने का एहसास देते थे। अगर हमारे पूर्वजों में महत्वपूर्ण दिखने  की ललक न होती, तो सभ्यताएं कभी नहीं बन पाती। उसके  बिना हम जानवर सरीखे होते।