the Power of positive thinking book review in Hindi. author Norman Vincent

इस किताब को डॉक्टर नॉर्मन विंसेट पील ने लिखा है। जो अमेरिकन मिनिस्टर और एक लेखक थे। वो अपनी सकारात्मक सोच के लिए जाने जाते थे।


ये बुक हमें बताती है। की हम सकारात्मक रहकर कैसे जी सकते है। सेल्फ कॉन्फिडेंस और भगवान पे भरोसा रखने से खुशियों के दरवाज़ खुल सकते है। और हम जो भी चाहे वो पा सकते है। दिमाग की शांति और एक अच्छी हेल्थ और कमाल कि एनर्जी। इस किताब में जो तरीके बताए गए है। उसके हिसाब से रोज की परेशानियों से हम लड़ सकते है। अपने दिमाग को शांत और भगवान पर भरोसा रखकर बहुत से अनुभव ले सकते है। ये किताब हमें ये भी सिखाती है। की हमें अपने हार को कैसे हराना है।

अध्याय 1    हमें शेल्फ कॉन्फिडेंस के साथ हमें अपनी काबिलियत पर भरोसा रखनी चाहिए। खुद पर विश्वास किए बिना हम खुश और सफल नही रह सकते है।

इंसेक्योरिटी और खुद में किसी चीज़ में कमी का एहसास हमें वो पाने से रोकता है। जो हम पाना चाहते है। सबसे पहले हमें उस कारण को जानना है। जिसमें सेल्फ कॉन्फिडेंस की कमी है। ये अचानक से नही होगा बस इसमें समय लगता है। जैसे की आपका एक बड़ा भाई है। जो 9% मार्क्स लाता था। और आप मुश्किल से 6% मार्क्स लाते थे। तो आपको ये भरोसा हो गया की अपने भाई की तरह आप कभी सफल नही हो सकते हो।

जबकि ये फेक्ट है। की बहुत से लोग स्कूल या कॉलेज में अच्छे नंबर नही ला पाए तो भी आज सफ़ल की  उचाई पर है। ये तो सवाल सोने से पहले और जागने के बाद दिन भर में कई बार दोहरा सकते है। मैं भगवान की दी हुई ताक़त से सब कुछ कर सकता हूं। हम जैसे भी है। और जो भी है। हमारे पास है। हमें भरोसा करना सीखना होगा। 

अध्याय 2   हमारा दिमाग बहुत शक्तिशाली हो सकता है।  अगर वो शांत है।  शांत दिमाग अच्छी  सेहत दे  सकता है। हम शांत  दिमाग पा सकते है। अपनी दिमाग को  खाली करके और हम अपने दिमाग को  खाली कर सकते है। अपने  परेशानियों को किसी  ऐसे इंसान के साथ शेयर  करके जिस पे हम विश्वास करते है। हमें   अपनी दिमाग को  नकारात्मक सोच से  दूर  रखना चाहिए। एक बार  हमारा दिमाग अगर शांत हो। जाए   तो बहुत से सकारात्मक शक्ति उत्पन्न करता है।   

लेखक ने हमें सोने के बारे में भी बताया है। इस में हम भगवान का शुक्रिया अदा करते है। उन सभी चीजों के लिए। जो हमारे पास है। जो हमारी परेशानियों को खाली करने में और चैन की नीद लेने में मदद करता है। हम सेम प्रोसेस को सुबह उठने के बाद भी दोहरा सकते है। ताकि हमारा आने वाला दिन अच्छा बीते इस तरीके से आप अपना दिमाग खाली कर सकते है। और साथ ही भगवान से शांति गिफ्ट की तरह मिलता है। 

अध्याय 3   हम अपनी दिमाग में जो भी  डालते हैै। हमारी शरीर उसी तरह रिएक्ट करती। अगर हमारा दिमाग थका हुआ है। तो हम थका हुआ महसूस करेगें। 
जब की कोई ऐसा काम कर दे जो हमें मजे़दर लगता हो। तो उस काम को पूरा शक्ति के साथ कर पाएंगे। तब हमारे दिमाग को भरोसा देना पड़ता है। अगर कोई इंसान अच्छी डाइट और अच्छी कसरत और नीद लेता है। तो शरीर ज्यादा ताकत बनायेगी। और अच्छी हैल्ड बना रहेगा। अथर बताते है। की मिस एडिसन से उनके पति महान एडिसन साइंटिस्ट के बारे में बहुत सारी बातें किया करते थे। 

वो उनको बताती थी। की एडिसन अपने लैब में दिन भर काम किया करते थे। जब वो घर आते तो कुछ घंटों के लिए शांत दिन लेते थे। ताकि उनको काम पर वापस से पूरा एनर्जी मिल सके। ज्यादातर हर सफल इन्सान नेचुरल और स्प्रिचुअल एनर्जी में बलैंस बराबर रखता है। हमारे आस पास की हर चीज़ की एक रिदम है। अगर हम इसको ध्यान से समझे और अपने रिदम को इस से मिलाले। तो एक बेहतर तरीके से काम कर सकते है। और इस तरीके से हमें कुछ भी करने की शक्ति मिल सकती है। 

अध्याय 4    ऐसा माना जाता है। की भगवान ही सभी एनर्जी का स्रोत है। लेेेेखक ने कहां है। की हैल्थ एक्सपर्ट
भी अपनी थरिपी  में प्रेसर प्रयोग करते है। प्रेसर से हम एक हैल्थी बॉडी और सोल पा सकते है। हैल्थी बॉडी को सोल का का मंदिर मान कर आराम करना चाहिए। अगर कोई इंसान मेंटली हैल्थी नही है। तो वो फिजिकली हैल्थी नही हो सकता।  प्राथना हमारी बॉडी और सोल को शक्ति देती है। कुछ तरीके है। जो अपने प्राथना को और बेहतर बना सकते है। हमें प्राथना को साधारण तरीकों से करना चाहिए। भगवान को कोई बड़ी चीज़ न मानकर ऐसे हम कोई अपनी दोस्त से बात कर रहे है। साथ ही हमें रोज प्राथना करनी चाहिए। अपनी बाकी कामो की तरह जैसे सुबह उठना। आफिस जाना ।और  भोजन करना। और हमें जो चीज़ चाहिए। 

प्राथना करते वक्त उसे सोचना चाहिए। जैसे कि हम सफल होने के बारे में सोचेंगे तो हमे सफलता ही मिलेगी। जो चीज़ हमें चाहिए। उस चीज़ की सोचे बहुत ही साफ होना चाहिए। अगर हम बताए हुए तरीको से प्राथना करें। तो हमारी प्राथना सच्चाई में बदल सकती है। प्राथना के कुछ साधारण तरीकों को भी पीछा करें। और रोज प्राथना करें। और उसे बोल कर प्राथना करें। जैसे आप किसी दोस्त से बात कर रहे है।  जो भी आप के पास है। उसे आप शुक्रिया बोले । प्राथना में आप कभी नाकारात्मक विचार को न लाए। दूसरो के लिए प्राथना करें इसे आप का भी मार्क्स  अच्छे आएंगे। डॉक्टर नॉर्मन का कहना है। की जब आप प्राथना करते है। तो आप सबसे शक्तिशाली शक्ति का एहसास करते है। 

अध्याय 5  हम खुद डिसाइड करते है। की क्या डिजर्व करते है। और क्या नही और क्या हमें खुश रहना चाहिए। या नही सारी खुशियां हम पा सकते है। बहुत से लोग उतना खुश होते है। जितना उनका दिमाग खुश होता है। हमें एक बच्चे की तरह होना चाहिए। जो हमेशा खुशी पसन्द करता है। नाकारात्मक एनर्जी  उस पर     शुट नही कर  पाती हम सब के पास  2 पसंदेे है। 1 या तो हम खुश रहे। 2 या तो हम खुश न रहे।  जो हम पसन्द करेंंगे हमें  वही  मिलेगा। लेखक का कहना है। बहुत से लोग   खुश न खुश अपना खुद बनाते है। आप अपना दिन शुरू करते। वक्त कुछ लाइन प्रयोग कर सकते । मैं जानता हूं। की आज का दिन एक। बेहतरीन दिन होगा।  मैं सभी परेशानी  को अच्छे से। हैंडल कर सकता   

मै मेंटली और फिजिकली अच्छे से महसूस कर रहा हूं पास जो भी है मै उसके लिए आभारी हूं मै भगवान को हर चीज़ के लिए शुक्रिया करता हूं। जिन्दगी अच्छी है।अगर आप हम  अगर उसे अच्छा बनाते है। तो हमेशा अपने लिए खुशियों को चुने। 
 
अध्याय 6  लेखक कहते है। की बहुत से  लोग   चीड़    चिड़ा और जिंदगी को डिफेक्ट और  कॉप्लिकैटेड बना लेते है। इस इरीटेशन की वजह से अपनी पॉवर को खो देते है। एक चीड़  चिड़ा  आदमी कभी   खुुुशियों को अट्रैक्ट नही कर सकता। हम सब आज कल भाग दौड़ भरी जिंदगी जीते है। भाग दौड़ की वजह से ना हम ठीक से सो पाते है। और नही हम ठीक से खा पाते है।हमें रोज अपनी बॉडी और दिमाग को शांत देना चाहिए। 

उसी तरह जैसे हम अपनी बाक़ी कामों को देते है। जैसे नहाना और ब्रश करना। कुछ बिंदु है। जैसे की आराम से चेयर पर बैठे। अपनी दिमाग को शांत रखें और थोड़े देर के लिए। किसी शांत सीन को सोचे जैसे की उगता हुआ सूरज और ढलती हुई शाम और चांद कि रोशनी।

अध्याय 7  लेेखक एक कहानी शेयर करते है। जिसे हम समझ सकते है। की जिंदगी में  कैसे हम  बेस्ट चीजें पा सकते है। एक बार एक लड़का था। जो बहुत ही अच्छा परिवार से था। और साथ में पढ़ा  भी था। फिर भी वो जो भी काम करता था। उस में असफल रहता था।  धीरे धीरे उसे दुनिया का सबसे शक्तिशाली नियम समझ में आने लगा।
सक मत करो बल्कि जो भी जीवन में चाहते हो उसकी उम्मीद करो। इस सोच ने उसे बहुत सफल आदमी बना दिया। लेखक कहते है। की जब आप बुरे की उम्मीद करते है। 

तो बुरा ही होता है। और जब आप अच्छे की उम्मीद करते है। तो आप को अच्छा ही मिलता है। हमेशा अच्छे की उम्मीद पूरा विश्वास के साथ करनी चाहिए। की जब वो हमारे साथ है। तो वो मेरे उल्टा कैसे हो सकता है। 

1 आस्था 2 काम 3 शक्ति 4 आचार्य

ये वर्ड अपने आप को रिमाइंड कराए और इसको बार बार दोहराएं ।  हम भगवान पर कभी  डाउट ना करे ऐसे कुछ नही है।जो भगवान हमें नहीं दे सकते। 

अध्याय 8   हमे  जो भी चीज आगे बढ़ने से रोकती  है। वो हमारे दिमाग की वजह से होती है। हमे दिमाग की इन्हीं रोकावटो   से छुटकारा पाना है।  जब हम किसी रुकावट  के खिलाफ खड़े होते है।  तो रुकावट उतना 
ताकतवर नही लगती है। हम जो भी करें। हमें उसके बारे में अच्छा सोचना चाहिए। लेखक ने एक लाइन में कहां है। 
अगर दिमाग साफ है। तो इंजन की तरह ज्यादा शक्ति देता है। अगर आप किसी परेशानी से हार गए है । तो हो सकता है। की आप  ने अपने आप को समझ लिया हो। आप उस परेशानी का कुछ नही कर सकते। इसलिए आप का दिमाग ही  इसी बात को मान लेता है। और आप जब अपनी दिमाग से बोलते है। की मै भगवान की मदद से कुछ भी कर सकता हूं। आप अपने दिमाग को एक सकारात्मक रवैया देते है। और दिमाग समझता है। की वो कुछ भी कर सकता है। आप को जितने का एहसास होता है।आप हार के बारे में सोच रहे है। तो आप को वही मिलेगी लेखक सिर्फ एक बात याद रखने को कहते है। मै हार में विश्वास नही करता।


अध्याय 9       चिंंता एक  खतरनाक बीमारी और मानसिक आदत है। इस आदत  के साथ हम पैदा नही  हुए है। हमे ये आदत लग गई है। अपनी दिमाग में मानसिक ताकत को बहनें से रोकती है। चिंता दिल की बीमारी और हाई ब्लड प्रेशर  का कारण है। इसकी वजह से इंसान का जीवन और  ही गया है।  चिन्ता को अपने  दिमाग से  निकालना पसिबल है। हमे अपने में भरोसा रखना है। की हम कुछ भी कर सकते  है। और  हमे दिमाग को खाली करना सीखना होगा। हालांकि दिमाग  को ही   खाली करना काफ़ी नही होगा।   क्योंकि खाली नही रह सकता। तो जब आप दिमाग को खाली करे।
उसको भरोसे और उम्मीद से भरने की कोशिश करें।ज्यादा जीने के  साधारण उपाय है। शांत रहे और भगवान से प्राथना करे और जीवन से चिंता को निकाल दे। 

लेखक कहते है। की एक बार एक 50 साल पुराना पेड़ कटने वाला था। काटने वाले ने पहले छोटी टहनियां कटी उसके बाद बड़ी टहनियां काटी।ताकि आस पास के पेड़ों को नुक़सान ना पहुंचे। क्योंकि कटे हुए छोटे पेड़ को 
संभलना काफी आसान होता है। इससे पता चलता है। चिन्ता चोटी होगी तो अपने जीवन को संभालना आसान होगा। चिंता की ख़त्म करने के लिए। कुछ तरीके है। चिंता एक मानसिक आदत है। जिसे मै भगवान की सहायता से बदल सकते है। मै भरोसे की आदत को सीखकर चिंते की आदत को छोड़ सकता हूं। और हर रोज जोर से बोले हमे विश्वास है। सकारात्मक लोगों के साथ रहे। इस चिंता की आदत से छुटकारा पाने में दूसरो की भी सहायता करें। 

अध्याय 10   परेशानियां हमारा जीवन का हिसा है। हमें इस बात को पूरा विश्वास होना चाहिए। की हर परेशानी हल है। लेखक कहते है। की जब हम किसी परेशानी में फस जाते है।तो भगवान हमारे आस पास ही है। हम जो भी करें हमे अपने भगवान को साथी ही मानना चाहिए। जैसे की हम जानते है।की चिंता शक्ति और एनर्जी को बेनिन नही देती। और  दिमाग भी ठीक से काम नही कर पाता है। जब हम अपने दिमाग को शांत रखते । है। तो सॉल्यूशन भी साफ दिखाई देने लगता है। 


अध्याय 11   आस्था हमारी सेहत को  ठीक करने  के लिए बहुत ही जरूरी है।  भगवान  के अनदेख  हाथ की तरह है जो  हमेशा  हमारे साथ रहता है। और दवाई के असर को बढ़ाता है। लेखक एक आदमी से मिले  थे।  जिसको बहुत  खतरनाक बीमारी थी। पहले वो आदमी भगवान को ज्यादा मानता ना था। पर जब उसने बाइबल पढ़ना शुरू की तो उसका भगवान मे विश्वास बढ़नेे  लगा ।  कुछ दिनों बाद उसकी बीमारी ठीक होने लगी। और  वो धीरे धीरे   पूरी तरह ठीक हो गया। इस से ये  साबित  हो गया।  की मानसिक हालत का हमारे स्वास्थ्य  पर सकारात्मक असर पड़ता है। 

अध्याय 12   ऐसा देखा गया है।  की चीड़  गुस्सा और नफ़रत  जैसी  चीजों से हमारी तबीयत खराब हो सकती है। तो इसका उपाय क्या है। अपने दिमाग़ को विश्वास प्यार और माफ़ी  जैसी भावनाओं से भरना होगा। ये हम एक छोटी सी कहांनी से  भी समझ सकते है। एक बार एक औरत  बीमार पड़ गई थी। उसको तेज  बुखार था। उसकी ऐसी हालत का कारण ये था। ऐसे आदमी से शादी करने को  मजबूर किया जा रहा था। जिसे वो पसन्द नही करती थी। पर जब उस औरत को पता चला की उसे शादी करना नही पड़ेगी। तो उसकी तबीयत तेज़ी से ठीक होने लगी। लेखक ने अच्छी सेहत के लिए कुछ चीजें बताई है। गुस्सा एक भावना है। और  में इंसान अपने मुट्ठी को कसकर बंंद  कर लेेता है। 

और आवाज़ उची कर लेता है। तो उसको रोकने के लिए अपनी उग्लियो को खोल देना चाहिए। और साथ ही अपनी आवाज़ को नीची कर लेना चाहिए। और बैठ या लेट जाना चाहिए। जोर से खुद को बोलिए। बेवकूफ़ मत बनो इस गुस्सा से कुछ फायदा नही होने वाला और भगवान को याद कीजिए। या किसी भगवान की लाइन 10बार कम से कम बोलिए जिस प्रकार हमारी अगुली को कट जाने पर तुरंत दवा लगाते है। उसी तरह हमें गुस्से। भी काबू में कर लेना चाहिए। तो जब आप अंदेखी चिंता व परेशानी से जाते है तो आप भी तबीयत जल्दी ठीक होने लगती ।


अध्याय 13     हमारी सोच बहुत ही  ताकतवर होती है। हमारी सोच इन बातों पर असर डालती है। की कैसा   जीवन हम  जीते है।  और कैसे इंसान हम बनेंगे हम जैसे सोचते है।  हम वैसा ही होते है।  हमें  ग़लत विचारो को  अपने दिमाग  से खाली  कर देंना चाहिए। हम अपनी सोच को बदलकर अपनी जिन्दगी को बदल सकते है। अपने पुराने थके विचारों को अपने दिमाग से अच्छे से भर देंना चाहिए। इस तरह से   जिंन्दगी को फिर  से बना सकते है।  एक नियम जो हमारी मदद कर सकता है।  जो है।  बिलीव और सक्सेस। 


अध्याय 14    इन दिनों हमारी रोज की जिंंदगी में चिंता और तनाव और नींद की कमी बहुत ही आम  बात है। इस चिंता और तनाव के। कारण लोग अपने ज़िन्दगी खुशी से नही जी पा रहे है। भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी तो को थोड़ा धीरे  कर और थोड़ा कर सकते   है। सब कुछ बिना परेशानी के शांत दिमाग  के  साथ करना चाहिए। सबसे पहले अपनी बॉडी को। ढीला  छोड़ना फिर अपने  दिमाग़ को  दिन भर में कई  बार खाली करना । भगवान के  बारे में सोचना एक साथ दिमाग के साथ हम  कोई काम पूरी ताकत के  साथ कर सकते है


अध्याय 15    आप ने कभी ना कभी किसी ये कहते  हुए सुना होगा। की  मुझे कोई फर्क नही पड़ता  कि लोग पसन्द करते है। या नही   और इंसान  सच नही  बोल रहा है। हम सभी चाहते है। की हर कोई पसंद करे। पर हमे समझना होगा। हम कुछ भी करे सब हमे पसंद  नहीं कर सकते। और इस बात से हमे परेशान नही होंना चाहिए। कुछ तरीको से आप पसंदीदा इंसान बन सकते है। सबसे जरूरी है। आप एक आराादायक और एक सुखद इंसान बने। आप लोगो में आसानी से घुल मिल सके। लोगो को उनके नाम से बुलाए किसी इंसान की  इगो या सेल्फ रिस्पेक्ट को  ठेस  ना पहुंचाए। लोगो की तारीफ़ करना सीखें साथ ही उनके बुरे वक्त में सहानुभूति दिखाएं हमे दूसरे लोगो को भी पसंद करना चाहिए। ऐसा करने से हमें पोजिविटी भेजते है। जो पलटकर वापस आती है। 


अध्याय 16    इस दुनियां में हर कोई अपनी जिन्दगी में कभी ना कभी सोक दुःख या और किसी तरह दिल का  दर्द का सामना कर चुका  है। अपने आपको किसी काम में लगा लेना एक तरह का बहेकावा है। जो। आपके दर्द को कुछ वक्त के लिए कम कर सकता है। पर भर नही सकता। जैसे  की पार्टी करना या शराब पीना हमें  अपने    दुख को बहा देंना चाहिए। जैसे कि रोकर या भावनाओं को दिखाकर रोना भगवान की  दी हुई । 

एक राहत देने वाला तरीका है। ऐसे कुछ तरीके है। जो दिल के दर्द से हम बाहर निकल सकते है। अगर आप किसी परेशानी का सामना कर रहे है। तो रोज करने वाले कामों को ना रोके। बहुत देर तक बैठकर सोचने से बचें मजे़दार काम में अपने आपको बिज़ी रखें। दुख को खाली करने  के लिए रोना अच्छा होता है। पर इसको रोज  के लिए आदत बनाना ठीक नही है। पुरी आस्था और विश्वास के साथ जुड़े रहे । 

 अध्याय 17     हमें हर परेशानी  की  तरह एक    पॉज़िटिव। अतिटयूड रखना  चाहिए।  भगवान से  ताक़त लेकर हर कोई खुश और ताकतवर बन सकता  है। सबसे अच्छी बात ये है। की भगवान की ये ताक़त हमारे आस पास ही होती है। कोई भी कभी भी ये ताक़त  के इस्तेमाल के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। शांत रहना और पूरा भरोसा रखना की भगवान हमे  वो ताक़त देगा लेखक एक कहानी बताते है  की एक शराबी था। उस आदमी ने बहुत कोशिश की शराब को रोकने की पर वो सफ़ल नही हुआ। फिर वो एक हॉस्पिटल गया डॉक्टर ने उसे कुछ  हप्तो में उसे छोड़ दिया। ये बोलकर  की जो उसके लिए कर सकते थे। वो कर चुके है। फिर उसने एक चर्च में गया। पर चर्च बंद था। अपने नाम का कार्ड वो चिट्ठी के डब्बे में डाल दिया। कुछ देर तक रोता रहा। कुछ देर के बाद अपने अंदर के ताक़त का उसे एहसास हुआ। उस को ख़ुद में एक बदलाव लगने लगा। इस घटना के बाद उसने  शराब हमेंशा के लिए छोड़ दी। और बिना शराब पिये अपना जीवन बिताया 

दोस्तो इस किताब में बहुत सारे ऐसे तरीका लिखें गए है। जो हेल्थी और खुशहाल जिंदगी जीने के तरीके बताए गए है।