डेल कार्नेगी ने लिखा है। जो एक ट्रावेलिंग सेल्स मैन थे। स्टूडेंट उन्हें पे करना चाहते थे। ताकि वे पब्लिक स्पीकिंग सीख सके। उनको एहसास हुए की उन्हें ये उनका स्किल बहुत ही कीमती है। और उनके सेंस सक्सेस का बहुत ही बड़ा हिस्सा है। उन्होंने डेल कार्नेगी इंटिट्यूट भी खोला। How to win friends and influence people से पब्लिक होने वाली बेस्ट सेलर बुक में से एक थी। 1936 में पब्लिश हुई थी। और इसके दुनिया भर में 15 मिलियन से भी ज्यादा कॉपिज बिकी। हर कोई इस बुक से कुछ ना कुछ सीख सकता है। इस में दिए गए प्रिंसीपल बहुत सिंपल है। जो हम अक्सर इस्तेमाल करने और याद करने से चूक जाते है। इस समरी में डेल कार्नेगी चार की कॉन्सेप्ट के बारे में बताते है। और उसके कुछ प्रिंसिपल भी बताते है। जो हम डिटेल में समझेगे। लोगो को हैंडल करने की फंडामेंटल तकनीक उन तरीक़े जिसे आप को लोग पसंद करें। अपने सोचने के तरीकों से लोगों को कैसे जीते। नाराजगी से लोगों को कैसे बदले।
1 तरीका लोगों को हैंडल करने के तरीके के बारे में है। लोगों को हैंडल करने के लिए तीन की प्रिंंसिपल है। चाहे आप के दोस्त या कलिंग हो या और कोई । निदा शिकायत ना करें। और इमंंदारी से तारीफ़ करें। दूसरे इंसान में उत्सुकता को जगाए। 1 प्रिंसिपल आपको लोगो को समझने का इंकरेज करता है। और उनके बर्ताव और पर्सनालिटी को मोटिवेट करता है। एकदम बुराई या शिकायत करने से पहलेे सहानुभूति दिखाए। थोड़ा दयालु बनना दोनों लोगों के लिए अच्छा होगा। जरूरत पड़ने पर थोड़ा सहन सील भी बने। सही जानने का मतलब है। सभी को माफ़ करना। 2 प्रिंंसीपल है। सच्ची और दिल से तारीफ़़ करना बहुत जरूरी है। हम सब इंसान है। हमें तारीफ़ से खुशी मिलती है। अगर आप किसी की तारीफ करतेे है। तो आपकी ईमानदारी याद रखते है। तो आपको बता पातेे हैै। की आप वही बोल रहे है।
जो वो सुनना चाहते है। अच्छे शब्दों में की गई तारीफ़ को लोग कभी नही भूलते है। उनके खुद के बारे में अच्छा महसूस होता है। एक ही तरीका है। लोगों से अपने पसंद की काम करवाने का तो ऐसे करवाओ की वो खुद करना चाहें। हमे काम को करने के लिए मोटिवेटेड महसूस होता है। जो विचार आप के पास थे। और जो काम आपको करना था। घमंड करने के बदले आराम से बैठें। और दूसरो को खुद विचार लेकर आने दे। उस काम के जीमेदारी का एहसास होने दे। इसमें उन्हें सफल होने की चाहत बढ़ेगी। और फायदा आपको मिलेगा। ऐसा कुछ जिनमें हम सब की चाह है। छः ऐसे प्रिंसिपल है। दूसरो से मंजूरी मिलना दूसरे लोग आपको पसंद करें। सच में बाक़ी लोगों में आप इंट्रेस्ट रखे।
याद रखें की एक इंसान का नाम जरुर है। अच्छे लिस्ट में और दूसरे लोगो को अपने बारे में इंक्रेज करें। दूसरे लोगो के पसंद के बारे में बात करें। दूसरे इंसान को जरूरी महसूस कराए और ऐसा ईमानदारी से करें हमे ये याद रखना चाहिए। की सच्ची दोस्ती के लिए हमें दूसरे की मदद करनी चाहिए। ना की सिर्फ मदद लेनी चाहिए। अगर आप दूसरों में रूची रखेंगे। तो आप दूसरे में पसंद आ सकते है। किसी रिलेशन के भविष्य के लिए आप को बहुत कुछ करना पड़ता है। आप को उन्हें दिखाना पड़ेगा की समय और एनर्जी के लायक है। आप सहानुभूति और निस्वार्थ हो सकते है।
एक उदरण है। की एक बार विल के राजकुमार को साउथ अमेरिका के टूर पर जाना था। उन्होंने स्पेनिश सीखने में महीनों बिताए। इस किया किया की वहा के लोगों को उसी भाषा में भासड़ दे सके। सभी लोग उनकी बात समझ सकें ना की इंगलिश बोलने वाले पता चलता है। की अपने देश वासियों के लिए काम समय और एनर्जी लगाई। आपकी मुस्कान आपकी अच्छाई का संदेश देती है। आपकी मुस्कान देखने वाली जिन्दगी को रोशन करती है। ये समझना मुश्किल है। की एक मुस्कान कितना असरदार हो सकती है। मुझको अंदाजा नही है। की किसी का दिन कैसा जा रहा है। जिस प एर्सनल प्रेशर में वो है। पर अजनबी किसी अजनबी और जानने वालों कि मूड बदल सकती है। और उनको भी मुस्कुराने के लिए मोटिवेटेड कर सकती है। मुस्कुराहट आप तक पहुंचना आसान बनाती है।
कांस्टेंट या फेक मुस्कान के पीछे ना आगे वो आपको दूर कर देंगे। याद रखें किसी इंसान के नाम को उसकी किसी भी भाषा में उसकी आवाज़ होती है। आपका नाम पूरे हक़ से आपका है। और आपकी पहचान का हिस्सा है। और वो आपसे अलग बनाता है। लोग आप को नाम बताए तो आप याद रखें उन्हीं के सामने दोहराए। हमें ये सुनना बेहद पसन्द है। खास उन्हीं का एहसास कराता है। आपको हर जगह इस्तेमाल करना चाहिए। चाहे वो आफिस का आदमी हो ये आपके कंपनी का सीनियर आदमी हो।चुप चाप बैठ कर सुनना काफी नही है। पूरे ध्यान और इट्रेस्ट लेकर सुनना होता है। आप अलर्ट है। ये दिखाने के लिए आप सामने वाले से सवाल करें। उसी टॉपिक पर जिस टॉपिक पर वो बात कर रहा है। उनके बातो को गहराई तक जाने के लिए काफी बातें करें। अपने बारे में बात करना काफी पसंद है।
इसलिए उन्हें बहुत ज्यादा उकसाने की जरूरत नही पड़ती है। उनको वो बस एक मौका दे। और सुने याद रहे आप जिन लोगो से बात कर रहे है। अपने प्रॉब्लम से ज्यादा वो अपनी प्रॉब्लम पे बात करने में ज्यादा रुचि रखते है। जब आप किसी से आप उनके पसंद के बारे में बात करते है। तो उनको फायदा होता है। एक इंसान से बात करके नया प्राइज मिलता है।
इस सेक्सन में 12 प्रिंसिपल है। सबका फोकस है। दूसरे को अपने तरीके इंक्रिज करने पर किसी भी आर्गुमेंट से बचना दूसरे लोगों की राय की इज्जत रखना अगर आप ग़लत है। तो इस मान ले इसे दोस्ताना तरीको से शुरुआत करें। दूसरे इंसान से है करवाए दूसरे इंसान को बात चीत करने दे। सामने वाले को ऐसा महसूस करने दे। की आइडिया उनका है। लोगो को उनके नजदीकियों से समझे ऐसा सहानुभूति रखें बड़ापन दिखाए आप अपने विचारो को नाटकीय बनाए। चुनौत
दे। 90% टाइम आर्गुमेंट किसी भी इंसान के लिए अच्छी तरह खत्म नही होते है। रिजल्ट ये निकलता है कि ज्यादातर लोग अपनी बातों से सहमत होते है।
ऐसा बहुत मुश्किल है। किसी भी आर्गुमेंट का कोई उपाय निकले या फिर लोग आर्गुमेंट करते हुए थक जाते है। और कुछ भी ना बदले किसी भी आर्गुमेंट से बचना ही अच्छा होता है। ये याद रखना भी जरूरी है। की हर कोई अपनी राय का हकदार है। आप किसी को भी ना बोले कि उनकी की उनकी राय ग़लत है। साथी हो या आपके कस्टमर हो या आपके कम्पनी में काम करता हो। अगर आप सहमत नही है। तो भी आप ना बोले कि वो ग़लत है। नही तो वो बुरा मान जाएंगे। घूमा फिराकर बात करें। अपना प्वाइंट रखने का आसान तरीका मिल जायेगा।
ये हम सबके साथ होता है। की हम कभी ना कभी ग़लत होते है। तो अगर आप ग़लत हो तो जितना जल्दी हो सके। आप मान ले। ईमानदार होना एक ऐसी खुबी है। जिसे सब पसंद करते है। खुद की गलती मान लेने से लोग आपकी इज्जत करते है। आप तुरंत अपना बचाव करेंगे। तो आप बुरे बनेंगे लड़ने से आपको और ज्यादा कुछ नही मिलेगा। गलती मान लेने से आपको उम्मीद से ज्यादा मिलता है।
दो तरीके किसी इंसान के सामना करने से आप फ्रेंडली बनकर उनका स्वागत कर सकते है। या उन्फ्रेंडली होकर लोगो को आप वैसे ही रिस्पॉन्स देते है। जैसे आप उनको देते है। एक फ्रेंडली और मिलनसार तरीका लोगो का दिमाग किसी आंधी से तेज बदल सकता है। हा लेखक ने एक खेल के बारे में बताया है। जो आप दूसरो से हा करवा सकते है। खेल का लक्ष्य यही है। की दूसरे इंसान आपकी बातों में हा में हा मिलाए। सामने वाले से ऐसा सवाल पूछने होंगे जिसका वो जवाब हा ही देगा। आपको इसी तरह एक के बाद एक सवाल पूछने होंगे। इस तरीको से सामने उस बात से हा कह सकता है। या वो कभी नही b करता है। इंसान होने के नाते हमें खुद बहुत पसंद है। दूसरे इंसान को जितना हो सके बोलने दे। देखेंगे की वो अपने काम अपनी प्रॉब्लम सब बता रहे है। वो आप सवाल पूछ कर बात को बढ़ा सकते है।
बीच में टोके नही ध्यान से सुने। ईमानदारी से इंट्रेस्ट दिखाए ताकि वो कॉफ्टेबल फिल करें। और कुछ एक्सप्रेस कर पाए। ये प्रिंसिपल बताता है कि दूसरो को महसूस होने दें। की ये आइडिया उनका है। ऐसा आदमी बनने की कोशिश ना करें। जिसके पास हमेशा सारी आइडिया और राय होती है। जो दूसरो पर थोपने की कोशिश करते है। सुझाव देना समझदारी है। और दूसरे इंसान को कंसक्यूज निकालने दे। उनके खुद के दिमाग में सब सही है। उनको समझने की कोशिश करें। की क्या जिसके वजह से उनको भरोसा है। की वो कुल सही है। उनके बुराई ना करें। कोई भी बेवकूफ़ ये कर सकता है। उनको समझने की कोशिश करें। समझदार और सहनशील और कुछ लोग ये समझने की कोशिश करते है।
खुद को उनके जगह पर रख कर देखे उनके एक्सपीरियंस से आप समझ सकते है। की वो जैसे है। वो ऐसे क्यों है। और जो वो करते है। वो क्यों करते है। हमेशा दूसरो की आइडिया और फीलिंग से डिजायर रखे। उनके लिए बहुत कीमती है। अगर आप से कोई कहे कि वो बहुत ज्यादा परेशानी में है। जिसके वजह से वो बुरा महसूस कर रहा है। तो उनको जवाब देने का सबसे अच्छा तरीका ये भी है। तो उनको ये बोले कि ऐसा सुनकर आप हैरान नही है। अगर आप उनके जगह होते तो शायद आपको भी ऐसा नही लगता उनको अकेला महसूस ना कराए।
नए लोगों को ध्यान में रखते हुए सबसे अच्छा मोटिव ये है। मानना की सबसे सच्चे और भरोसेमंद है। ये नियम के कुछ खासियत है। और वो लोग जो सच्चे नही भी है। वो भी ऐसे रिएक्ट कर सकते है। जब उनके साथ एक दोषी की तरह बर्ताव ना किया जाए। जैसा कि कहते है। की दोषी साबित होने तक निर्दोष है। टीवी और मूवी जैसी मीडिया की वजह से हम देखने के आदि हो गए है। सीधा सच बोलना हमे इंप्रेस नही करता है। हमे सच को और आगे तक ले जाना चाहिए। उस नाटकीय उज्वल और मजेदार बनाए। सब को देखने दे। जो आप दिखाना चाह रहे है। आम बात जानने के बजाय उस मजे़दार बात को सुनना ज्यादा पसंद करेंगे।
लोग आपकी तरह सोचे उसके लिए आप चुनौती रखे। इंसान होने के नाते हमे खेल मुकाबला और चुनौती और खुद साबित करने का मौका बेहद पसंद है। उनको एक्सप्रेस करने का एक मौका अपने काबिलियत साबित करने का और जितने का । लोगो को बिना नाराज किए कैसे बदला जाए। एक असरदार लीडर बना जाए। ईमानदार तरीके से शुरुआत करे। लोगो के गलतियों पर घूमा फिराकर ध्यान दे। लोगो की बुराई से पहले अपने गलतियों के बारे में बात करें। हुकुम देने के बजाय सवाल पूछे हर इंसान को बचाने को मौका दे। हर छोटे सुधार की तारीफ करें। दूसरे इंसान के लिए अपना अच्छा नाम बनाए।
कमियों को सुधारने के लिए प्रोत्साहन का इस्तेमाल करें। अपने सुझाव से दूसरे इंसान को खुश करे। ईमानदार तारीफ़ के साथ शुरुआत करें। सामने वाले को गर्व कि भावना और आत्म विश्वास देगा। और आप से खुश होंगे। और आप से राय लेना चाहेंगे। तारीफ़ से बात करना उस डेंटिस्ट की तरह है। जो अपना काम पेन किलर से शुरुआत करता है। मरीज अब भी डीलिंग तो करवाएगा। पर पेन किलर से दर्द खत्म हो जाता है। ये पिछले प्रिंसिपल से ही जुड़ा है। तारीफ़ से शुरुआत करना अच्छा है। पर आखिर में बट बोलकर उनकी गलती को डिस्कस करने लगते है। तो आप सारा काम खराब कर देते है।
जो आप ने पहले सेंटेंस में किया या आप घूमा फिराकर एक ही गलती डिस्कस करें तो कोई भी सेंसिटिव इंसान अच्छे से मनेगा और सीखेगा। ज्यादा बुराई करना कुछ ही लोगो पर काम करता है। ज्यादातर लोग इसे सुनने से बहुत डरते है। हम सब इंसान है। और इस दुनिया में कोई भी परफ़ेक्ट नही हो सकता है। और सबने गलतियां कि है। आप को किसी और कि गलती पर जाने से पहले आपको खुद की गलती मान लेनी चाहिए। शायद आप इस तरीके से बता सकते है। की उन्होंने क्यों ऐसी गलती की उन्होंने पहले भी ऐसी गलती की थी। एक बेहतरीन तरीक़ा है।
किसी भी बर्ताव को बदलने को खुद को बॉस समझना बहुत ही आसान है। अपने आस पास के लोगो को बताना कि कब क्या करना है। पर असल में किसी काम के रफ्तार को बदलने के लिए अपने स्टाफ को एक शजेशन एक्सप्लेन कर सकते है। उनसे पूछ सकते है। की उनको क्या लगता है। इस चीज़ को करने का सबसे बेहतर तरीका क्या है। ये जिम्मेदारी उनकी हाथों में होगी। अपने आइडिया के साथ आयेंगे। और लगातार ज्यादा काम करने की कोशिश करेंगे। कोई भी बेइजत होना नही चाहता। और दूसरे इंसान को बेईजत करने की कोई जरूरत नही है। आप सिर्फ उनके आत्म सम्मान को नुक़सान पहुंचा रहे हो।
चाहे वो कितना भी ग़लत हो आपको उनके गर्व और आत्म सम्मान को ठेस नही पहुंचाना चाहिए। आप उनके बारे में क्या सोचते है। इस उनको फर्क नही पड़ता आप अपने बारे में क्या सोचते है। इस फर्क पड़ता है। एक इंसान के गरिमा में दुख पहुंचाना एक क्राइम है। जब लोग अपने बारे में अच्छा महसूस करते है। तो वो बेहतर जवाब देते है। इसलिए छोटी छोटी सुधार की तारीफ़ करे कोशिश करें कि हर सुधार को ठीक से पहचाना जाए। लोगो को बदलने के बारे में बात करें। अगर आप लोगो को इंस्पायर करेंगे। लोगो को उनकी छुपी हुई प्रतिभा का अहसास कराकर बेहतर बना सकते है। ये बात साफ है। की जब आप किसी की बुराई करते है। तो आप उनको नीचा दिखा रहे होते है। साथ ही उनके आत्म विश्वास को नुक़सान पहुंचा रहे होते है। हो सकता है।
की इससे बेहतर के बदले वो बेकार काम करें। उनकी तारीफ करके उनके विश्वास को बढ़ाना
और मेहनत को उनके काबिलियत देने के लिए ताक़त का इस्तेमाल करते है। लोगो के लिए एक अच्छी रिपोटिशन बनाए आप एक मिसाल बने। आप जैसे बनने के लिए लोगों को एक वजह दे। जिसके वजह से आप जैसा नाम और इज्जत कामना चाहे। अगर आप किसी ऐसे सिचुएशन का सामना कर रहे है। इसमें किसी ने बेवकूफी कर दी है। तो उनको सीधा नाम बताए ये उनके बेहतर होने की चाहत को खत्म कर देगा। बल्कि आपको उनको प्रोत्साहन करना चाहिए। उनको ऐसा दिखाए सब कुछ ठीक करने का एक आसान तरीका है। ऐसा वो जो खुद कर सके इस तरह वह स्पोटेड महसूस करेगें। सिचुएशन को ठीक करने के लिए वो कुछ भी करेंगे।
अन्तिम फेक्ट कहता है। की आपको दूसरे इंसान को खुश करने के लिए कुछ महसूस कराना चाहिए। अगर उस काम को करने के लिए खुश है। तो उसे वो जरूर खुश करेंगे। वो भी बहुत अच्छे से उन्हें इंक्रीज करे।अपने जुनून को थोड़ा इंस्पायर करें। की कोई भी काम खुशी से कर सके।
तो दोस्तो दूसरे लोगों को समझना बहुत ही जरूरी है। चीजों की दूसरे लोगों की नजरिया से देखना बहुत जरूरी है। हमेशा ईमानदार रहे। सीखें की अच्छा सुनने वाला इंसान कैसे बना जाए। किसी भी कीमत पर बहस करने से बचें। लोगों की और आपकी अलग राय हो सकती है। इसे मान ले। अपनी गलतियों को माने लोगों से अपने काम करवाने के लिए प्रोत्साहित और तारीफ़ करना बहुत जरूरी है। हुकुम ना दे। बल्कि सवाल पूछे। किसी और को शर्मिंदा न करें। उनके अभिमान को ठेस ना पहुंचे।
