mahan chanakya ki kuch bate



(1)  इस सलोक में आचार्य चाणक्य कहते है। अर्थ नाश, यानी कि धन से जुड़ी बातें, किसी से नहीं कहनी चाहिए। यदि हमें धन की हानि का सामना करना पड़ रहा है,या हमारी आर्थिक इस्थिती बिगड़ गई है,तो यह इस्थीती किसी के सामने नहीं प्रकट करनी चाहिए। ये बात अगर सभी को मालूम हो जायेगी,तो धन संबंधित मामलों में कोई  मदद नहीं करेगा। समाज में गरीब व्यक्ति को धन की मदद अर्थात,सहायता प्राप्त नही हो पाती,इस बात को सदैव गुप्त रखनी चाहिए। 

(2) चाणक्य कहते है,की हमें अपने की बाते किसी को नहीं बतानी चाहिए। यदि हम मन की बात दूसरों पर जाहिर करेंगे,तो लोग उसका मजाक बना सकते है,क्योंकि समाज में ऐसे लोगों की कमी नहीं है,जी दूसरों के दुखो की मजाक बनाते हैं। ऐसे होने पर दुख और बढ जाता है। 

(3)   चाणक्य कहते हैं,की समझदार व्यक्ति वह है, जो अपनी पत्नी से बाते गुप्त रखता है। झगड़े,या सुख,दुख, की बातें यह नहीं करना चाहिए। अगर हम उन जुड़ी कोई भी छोटी या बड़ी बाते बताते हैं,तो धीरे धीरे ये बात कानों कान फ़ैल जाती है। और बात का बतंगड़ बन जाता है। जो पुरुष ऐसा करते है, वो भयंकर परिणाम और संकट झेलते है। 

(4)   चाणक्य का कहना है,की यदि कोई नीच व्यक्ति अगर हमारा अपमान किया है,तो ये घटना को हमें किसी से नहीं बतानी चाहिए,ऐसी घटना की जानकारी लोगों को मालूम होती है,तो वही लोग हमारा मजाक बनाएंगे,और हमारी प्रतिष्ठा में कमी आयेगी।