jhagre se ham Apne aap ko kaise bachaye in Hindi motivate


अगर आप बहस करते है या विरोध करते हैं तो आप कभी कभी जीत सकते है, पर यह जीत खोखली होगी,क्योंकि आपने कभी सामने वाले का समर्थन नहीं जीता।

गौतम बुद्ध ने कहा था "नफ़रत कभी नफ़रत से नहीं, प्यार से खत्म होती है और आपसी गलतफहमी कभी बहस से नहीं, बल्के समझदारी, थोड़ा झुकने और दूसरे का नज़रिया समझने की सहानभूति भरी इच्छा से खत्म होती है।"

ईमानदार रहिए। जिन चीजों पर अपनी गलती स्वीकार कर सकते है,स्वीकार कीजिए। अपनी गलतियों के लिए खेद व्यक्त कीजिए। इससे आपसे झगड़ने वाले का प्रतिरोध कम होगा।

अपने विपछी के आइडिया पर सोचिए और उनका बारीकी से अध्ययन कीजिए।ऐसा सच्चाई से कीजिए। हो सकता है, वो सही हो।इस चरण पर उनके बारे में सोच विचारकर उनसे सहमति बनाना अच्छा हैं, नहीं तो जल्दी से जल्दी आगे बढ़ जायेंगे और ऐसी स्थिति में पहुंच जायेंगे, कहा आपका विपक्षी कह सके " हमने बताने की कोशिश की थी,पर तुम सुनते कहा हो।"

अपने विपच्छियो का दिलचस्पी दिखाने के लिए धन्यवाद कीजिए।जो भी आपसे असहमति बनाने के लिए वक्त निकलता है,वह उन्हीं चीजों को चाहता है जिन्हें आप चाहते है।उन्हें वैसे लोगों की तरह सोचिए, जो आपकी मदद करना चाहते हैं और फिर आपके विपच्छी आपके दोस्त बन जायेंगे।

दोनो पछ अच्छी तरह से समस्या पर सोच सके, इसलिए कुछ समय के लिए कोई कदम न उठाए। सलाह दीजिए की अगला मीटिंग उस दिन बाद में या अगला दिन रखी जाए,ताकि सारे तथ्यों को सामने। लाया जा सके।इस मीटिंग की तैयारी में खुद से कुछ कठिन सवाल पूछे=

क्या मेरे विपक्षी सही हो सकते है? थोड़ा बहुत? क्या उनकी बातों और तर्क में मतलब है? क्या मेरी प्रतिक्रिया का हल निकालगी या फिर सिर्फ मेरी हताशा निकलेगी?
क्या मेरी प्रतिक्रिया मेरे विपच्छयो को मुझसे दूर ले जायेगी या मेरे करीब ले आयेगी?क्या मेरी प्रतिक्रिया मुझे लोगो की नजरो में ऊपर ले जायेगी? क्या मैं जीतूगा या हरूगा? जितने पर मुझे क्या कीमत चुकानी होगी? अगर मैं चुप रह जाऊं तो क्या यह विवाद समाप्त हो जायेगा? क्या यह कठिन परिस्थिति में मेरे लिए एक अवसर हैं?

ओपेरा टैनर जान पियर्स, शादी के करीब पचास साल बाद एक दिन मुझसे बोले  मैं और मेरी पत्नी ने एक  समझौता किया है और हमने इसका पालन किया है, भले ही हम एक दूसरे पर कितना भी गुस्सा हो जाए। जब एक चिल्लाता है तब दूसरा सुनता है क्योंकि जब दो लोग चिल्लाते है तो कोई सौवाद नहीं होता सिर्फ शोरगुल होता है।"

किसी बहस का सबसे अच्छा परिणाम तभी निकलता है जब इसे न किया जाए।