असम्भव कुछ नही होता दोस्त और मै बहुत ईमानदारी से 10साल का निचोड़ निकालकर बता सकता हूं। दुनिया में असम्भव नाम का कोई शब्द होता ही नही। इंसान कभी भी चंद्रमा पर नही पहुंच सकता। पृथ्वी विज्ञान की अधिकतर सीमा है। डॉक्टर लिवी फोरेस्ट मशहूर वैज्ञानिक हुए बहुत बड़े साइंटिस्ट हुए। एक स्टेटमेंट इन्होंने पास किया। सन 1955 के अंदर उन्होंने कहां की इंसान कभी भी चंद्रमा पर नही पहुंच सकता। और नील अल्मस्ट्रांग ने सन 1969में पहुंच गए अपना बस्ता उठाकर। उसके बाद तो स्पेस जॉर्ने ऐसी हो गई की ऐसा जैसा की आप एक देश से दूसरे देश चले जाते है।
लार्ड केल्विन बहुत बड़े साइंटिस्ट हुए उनका स्टेटमेंट आया कि सिर्फ पछिया ही उड़ान भर सकते है। हवा से भारी मशीन को उड़ान भरना असंभव है। हवा से कुछ भी भरा हो वो उड़ सके। ग्रेविटी उसको गिरा देगा।लेकिन तमाचा मारा इन लोगों ने तमाचा मारा और लिख कर दिया। की साईकिल के पार्ट से हमने इंसानों को पच्छी बना दिया। 16साल लगे राइट बंधू को जहाज का निर्माण करने में इन लोगो ने उनकी बात नही सुनी। जिन लोग कहते थे। की वायु का सिद्धांत तुम्हारे विपरीत है। ये बात भौरे को कही जाती थी। भंवरा वायु के सिद्धांत के कारण कभी भी जीवन में उड़ नही सकता। क्योंकि पंख उसके शरीर से हल्के होते है।
लेकिन भवरा कभी किसी स्कूल में गया ही नही। मेरे डाक्टर ने मुझे कहां की तुम कभी चल नही सकती विल्मा रोडोल्फ एक ऐसी एथलीट्स हुई जिनको पोलियो था। डाक्टर ने कहा कि तुम चल नही सकती। लेकिन मां ने कहा कि तुम चल सकती हो। उन्होंने कहा कि मै डॉक्टर की बात नही मानी। मैंने मां की बात मानी।तीन ओलंपिक गोल्ड मेडल जीता है। ये लड़की जिसको डाक्टर कह रहा है। की तुम चल नही सकती लेकिन मां क्या बोलती है। मै इसका उदारण देना चाहूंगा। बहुत छोटे थे। अल्ब ऐस्टीन दुनिया के महान वैज्ञानिक में से एक थे। मंद बुद्धि कहा जाता था। आठ साल के थे। वो घर पहुंचे मां को एक चिट्ठी दिया। मां ने वो चिट्ठी को पढ़ा।और चिट्ठी में प्रिंसिपल का खत था।
मां के नाम प्रिंसिपल ने ये लिखकर भेजा कि आप का बच्चा विलक्छन प्रतिभा का धनी है। महान सकती है। इसके अंदर बहुत बड़े साइंटिस्ट बने। इनको मंद बुद्धि बचपन मै समझा जाता था। आपका का बच्चा विलक्चन प्रतिभा का धनी है। इसके अंदर सीम प्रति संभावनाएं है। हमारे स्कूल हमारे टीचर हमारे फैकल्टी इस लायक नही है। की हम आप के बच्चो को अच्छी शिक्षा दे सके। आप अपने बच्चे को घर पर पढ़ाइए। हम लायक नही है। की आप के बच्चे को हम पढ़ा सके। और उनकी मां ने पढ़ते पढ़ते आंखों में आशु ले आई। उसने बच्चे से कहां की कल से तु स्कूल नही जायेगा। मै तेरा परवरिश घर पर करूंगी।
तेरा टीचर इस लायक नही समझता मतलब वो अपने लायक नही समझता बच्चा खुश हुआ और मोटिवेट हो गया। और वो पढ़ाई में लग गया। और उनकी मां का निधन हो गया। अल्बर्ट आइंस्टीन अब बहुत बड़े साइंटिस्ट हो गए। अल्बर्ट आइंस्टीन जब बहुत बड़े साइंटिस्ट हुए। तब एक दिन मकान शिफ्ट कर रहे थे। जीवन की सच्ची घटना वो अपने ऑटो बायोग्राफी में लिखते है। जब मै मकान शिफ्ट कर रहा था। तब एक ड्रास के अंदर मुझे व्हाइट कलर एक पेपर फोल्डेड अवस्था में मिला। मुझे समझ नही था। की वो क्या है। उसके उपर का मिट्टी हटाकर जब उस कागज को खोला।
तब वो टीचर का लेटर था। जो बहुत साल पहले टीचर ने मेरे हाथ में दिया था। और मैंने अपने मां के हाथ में रखा था। और वो बहुत उत्सुकता के साथ वो खत को पढ़ने लगे। जैसे उन्होंने खत पढ़ना शुरू किया। वो जार जार होकर रोए। उसमें लिखा था कि तुम्हारा बच्चा मंद बुद्धि है। ये हमारे स्कूल के लायक नही है। इसको आज के बाद हमारे स्कूल में मत भेजना इस का परवरिश आप खुद किया करें। मां ने इस खत को उल्टा पढ़ा। की नही ऐसा नही है। तू सब कुछ कर सकता है। तेरे पास शक्ति है। तेरे अन्दर प्रतिभा है।
दोस्तो इस दुनिया में किसी की बात मत सुनना। जो तुम्हें बोले कि तू नही कर सकता तो कहना की तु नही कर सकता हम करेगें।
