सरदार वलाभाई पटेल की 10बाते।



(1)   मेरा एक ही इच्छा है,की भारत एक अच्छा उत्पादक हो और इस देश में कोई अन के लिए आंसू बहाता हुआ भूखा ना मरे।

(2)   जो तलवार चलाना जानते हुए भी तलवार को म्यान में रखता है, उसी की अहिंसा सच्ची अहिंसा कही जायेगी। कायरो की अहिंसा का मुल्य ही क्या? और जब तक अहिंसा को स्वीकार नहीं किया जाता तब तक शांति कहां।

(3)   मनुष्य को ठंडा रहना चाहिए, क्रोध नहीं करना चाहिए। लोहा भले ही गर्म हो जाए, हथौड़ा को तो ठंडा ही रहना चाहिए,अन्यथा वह स्वयं अपना हत्था जला डालेगा।

(4)   कठोर से कठोर हदय को भी प्रेम से वश में किया जा सकता है, प्रेम तो प्रेम है, माता को भी अपना काना कुबड़ बच्चा भी सुंदर लगता है, और वह उससे असीम प्रेम करती है।

(5)   शक्ति के अभाव में विश्वास व्यर्थ है, विश्वास और शक्ति दोनो किसी महान काम को करने के लिए आवश्यक है। 

(6)   कठिनाइयां दूर करने का प्रयत्न ही ना हो तो कठिनाइयां कैसे मिटे इसे देखते ही हाथ पैर बांधकर बैठ जाना और उसे दूर करने का कोई भी प्रयास ना करना निरी कायरता है।

(7)   शक्ति के अभाव में विश्वास किसी काम का नही है,विश्वास और शक्ति दोनों किसी महान काम को करने के लिए अनिवार्य है।

(8)  मेरी तो आदत पड़ गई है, की जहां पैर रख दिया वहा से पीछे न हटाया जाए, जहा पैर रखने  के बाद वापस लौटना पड़े, वहा पैर रखने की मुझे आदत नहीं अंधेरे में कूदना मेरा स्वभाव नहीं है। 

(9)   किसी तंत्र या सस्थान की पुनः निदा की जाए तो वह ठीक बन जाता है, और सुधारने की बजाय निंदक की ही निंदा करने लगता है।

(10)   आपको अपना अपमान सहने की कला आनी चाहिए।