बाबर साहब भीम राव अंबेडकर की 10 बाते।
(1) जब तक आप सामाजिक स्वतंत्र नही हासिल कर लेते,कानून आपको जो भी स्वतंत्र देता है,वो आपके किसी काम की नही।
(2) एक सफल क्रांति के लिए सिर्फ असंतोष का होना पर्याप्त नही है। जिसकी आवश्यकता है,वो है। न्याय एवं राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों में गहरी आस्था।
(3) जो धर्म जन्म से एक को श्रेष्ठ और दूसरे को नीच बताए वह धर्म नहीं, गुलाम बनाए रखने का षड्यंत्र है।
(4) अन्याय से लड़ते हुए आपकी मौत हो जाती है,तो आपकी आने वाली पीढ़ियां उसका बदला अवश्य लेगी, किंतु अन्याय सहते सहते यदि मर जाओगे तो आने वाली पीढ़ियां भी गुलाम बनी रहेगी।
(5) हिटलर जैसे जालिम इंसान ने भी किसी को पानी पीने से नहीं रोका होगा! अंदाजा लगाओ वो कितनी जालिम कौम रही होगी,जिसने हजारों साल 85% इंसानों को अछूत बनाकर पानी पीने पर ही पाबंदी लगा रखी थी।
(6) पानी की एक बूंद के विपरित जो समुन्द्र में शामिल होने पर,अपनी पहचान खो देती है, मनुष्य उस समाज में अपना अस्तित्व नही खोता, जिसमें वह रहता है। मनुष्य का जीवन स्वतंत्र है। उनका जन्म अकेले समाज के विकास के लिए नही बल्कि स्वयं के विकास के लिए हुआ है।
(7) डाक्टर बाबा साहब ने कहा था। अनपढ़ या कम पढ़े लिखे लोगो को किसी भी बात या मुद्दे पर एक करना आसान है। लेकिन पढ़े लिखे लोगों को संगठित करना मेढक को तराजू में तौलने के समान है। जब दूसरे को तराजू में डालते है।तब तक पहला कूद कर भाग जाता है। क्योंकि हर पढ़ा लिखा व्यक्ति अपने आपको हर बात में दूसरे से ज्यादा श्रेष्ठ समझता है।
(8) 4 साल का ब्राह्मण का पुत्र अपना 4000 हजार साल पुराना इतिहास जानता है, और हमारा 40 साल का व्यक्ति अपना 100 साल का इतिहास भी नही जानता एक ये भी हमारा गुलामी का कारण है।
(9) आपके पास जमीन नहीं है, क्योंकि अन्य लोगों ने उसे हड़प लिया है, आपके पास नौकरी नहीं है, क्योंकि दूसरे लोगों ने उस पर एकाधिकार जमा रखा है। भाग्य (तकदीर) पर भरोसा मत करों। केवल अपनी छमता और शक्ति पर विश्वास करों।
(10) बाबा साहब कहते है, पिछड़े लोगों को हाल तकलीफ और त्याग की ज्वालाओं से गुजरे बगैर ऊंचा स्थान प्राप्त नहीं होगा।अपने उज्वल भविष्य के लिए उन्हें वर्तमानकालीन सुख और आवास्यकताओ का त्याग करना चाहिए। जिन लोगों में हमारा जन्म हुआ उनका उदार करना यह हमारा कर्तव्य है,इस बात का जिन्हें एहसास है,वे धन्य है। गुलामी पर हमला करने के लिए जो तन, मन, धन, और जवानी कुर्बान करते है,वे धन्य है। और पिछड़ों को उनके मानवीय अधिकार पूर्णतः मिलने तक जो अच्छे की, बुरे की, सुख की, दुख की, संकटों की, तूफानों की, मन की, अपमान की परवाह ना करते हुए, एक जैसे संघर्ष करते रहते है, वे धन्य है।
