महावीर स्वामी की 10 सफल बातें।


( 1  )   स्वयं से लड़ो, बाहर दुश्मन से क्या लड़ना। वह जो स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेता है, उसे आनंद की प्राप्ति होती है।

(2)   जिस प्रकार आप दुःख पसंद नहीं करते उसी तरह और लोग भी इसे पसन्द नहीं करते, ये जानकर, आपको उनके साथ वो नहीं करना चाहिए, जो आप उन्हें आपके साथ नहीं करने देना चाहते । _ महावीर स्वामी

(3)   एक व्यक्ति जलते हुए जंगल के मध्य में एक ऊंचे वृछ पर बैठा है, वह सभी जीवित प्राणियों को मरते हुए देखता है,लेकिन वह यह नहीं समझता की जल्द ही उसका भी यही हस्र होने वाला है, वह आदमी मूर्ख है।

(4)   भगवान का अलग से कोई अस्तित्व नहीं है, कोई सही दिशा  में उत्तम प्रयास से दिब्यता प्राप्त कर सकता हैं।

(5)   जिस तरह से आग को ईंधन से नहीं बुझाया जा सकता हैं, उसी तरह कोई भी जीवित प्राणी तीनों लोको की सारी धन दौलत से संतुष्ट नहीं हो सकता है।

(6)   क्या तुम लोहे की धधकती छड़ सिर्फ इसलिए अपने हाथ में पकड़ सकते हो, क्योंकि कोई तुमसे ऐसा करवाना चाहता है? तब क्या तुम्हारे लिए ये सही होगा की तुम सिर्फ अपनी इच्छा पूरी करने के लिए दूसरों से ऐसा करने को कहो, यदि तुम अपने शरीर या दिमाग पर दूसरों के शब्दों या कृत्यों द्वारा चोट बर्दाश्त नहीं कर सकते हो, तो तुम्हें दूसरों के साथ अपने शब्दों या कृत्यों द्वारा ऐसा करने का क्या अधिकार है।

(7)   हमने कभी किसी के लिए अच्छा काम किया है, तो उसे भूल जाना चाहिए। अगर कभी किसी ने हमारा बुरा किया है, तो उसे भी भूल जाओ।

(8)   हमारी आत्मा से बाहर कोई भी शत्रु नहीं है। असली शत्रु है, खुद पर विजय प्राप्त करना लाखों शत्रुओं पर विजय पाने से अच्छा। है।

(9)   सुख में और दुःख में , आनंद में और कष्ट में, हमें हर जीव के प्रीत वैसी ही भावना रखनी चाहिए, जैसा की हम अपने प्राप्ति रखते है।

(10)   आपकी आत्मा से परे कोई शत्रु नहीं है, असली शत्रु आप ही के अंदर है, वे लालच, द्वेष, क्रोध, घमंड, अशक्ति और नफरत है। 



जो पर पीड़ा मन में धारे, वो नयन नीर हो जायेगा।
जो नैनों की भाषा समझा, अनकही पीर हो जायेगा। जो जीवन के व्यामोह मोह को, तजकर छग गंगाजल से।
तन मन को तीर्थ बना लेगा, वो महावीर हो जायेगा।