(1) जब तक लाखों लोग भूखे और अज्ञानी है, तब तक मैं हर उस आदमी को गद्दार मानता हूं, जो उनके बल पर शिक्षित हुआ है,और अब वह उसके तरफ ध्यान नहीं देता।
(2) जिस समय जिस काम का संकल्प करों उसे उसी समय पूरा करो,वरना लोगों का आप पर यकीन नहीं रहेगा।
(3) भरोसा भगवान पर है, तो जो लिखा हैं तकदीर में वही पाओगे, भरोसा खुद पर है,तो भगवान वही लिखेगा जो आप चाहोगे।
(4) सभी कमजोरी सभी बंधन मात्र कल्पना है कमजोर न पड़े! मजबूती के साथ खड़े हो जाओ! शक्तिशाली बनो! मैं जानता हूं की सभी धर्म यही है, कभी कमजोर नही पड़े, आप अपने आपको शक्तिशाली बनाओ, आप के भीतर अनंत शक्ति है।
(5) जब तक आप खुद पर विश्वास नही करते है, तब तक आप भगवान पर भी विश्वास नहीं कर सकते।
(6) क्या तुम नही अनुभव करते की दूसरों के ऊपर निर्भर रहना बुद्धिमानी नही है। बुद्धिमान व्यक्ति को अपने ही पैरों पर दृढ़ता पूर्वक खड़ा होकर कार्य करना चाहिए। धीरे धीरे सब कुछ ठीक हो जायेगा।
(7) जैसा तुम सोचोगे,वैसा ही बन जाओगे खुद को निर्बल मानोगे तो निर्बल सबल मानोगे तो सबल ही बन जाओगे।
(8) जो कुछ भी तुमको कमजोर बनाता है, शारीरिक, बौद्धिक, या मानसिक, उसे जहर की तरह त्याग दो।
(9) पढ़ने के लिए जरूरी है एकाग्रता, एकाग्रता के लिए जरूरी है, ध्याना, ध्यान से ही हम इंदिरियो पर सयम रखकर एकाग्रता प्राप्त कर सकते है।
(10) मेरे गुरु श्री रामकृष्ण कहते थे, की जब तक मैं जीवित हूं, तब तक मैं सीखता हूं, वह आदमी उसका समाज पहले से ही मरा है,जिसके पास अब सीखने के लिए कुछ नही बचा।
